इस गांव में अब कोई सोता नहीं
इस गांव में अब कोई रोता नहीं
बात हुनर की नहीं हौसले की है
अब यहां तिनकों में तूफान उतर आया है
जिन आंखों ने कभी रोशनी देखी न थी
उन आंखों में अब सूरज उतर आया है
जिन लबों ने बोलना सीखा न था
उन लबों पर अब शोर उतर आया है
वो सोचते थे कतरों का क्या है आ मिलेंगे दरिया से
इन कतरों में अब समंदर उतर आया है
इस गांव में अब कोई सोता नहीं
अब यहां बेहतरी का ख्वाब उतर आया है
वो सोचते थे ये मोम के परिन्दे हैं, जल जाएंगे
अब सूरज पूछ रहा है, हौसला क्या है
वो सोचते थे ये दीये हैं पनाह मांगेंगे
अब तूफान पूछ रहा है, माजरा क्या है ?
इस गांव में अब कोई सोता नहीं
इस गांव में अब कोई रोता नहीं
मुल्क बनाने का तसव्वुर है यहां
अब हर शहर पूछ रहा है पता क्या है ?